अब मध्य प्रदेश में भी गुजरात महाराष्ट्र तमिलनाडु जैसे कार्य किया जएगा मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव जी
इमेज में दी गई खबर के आधार पर एक तैयार समाचार ड्राफ्ट (News Report साध्वीग समाचार):
मप्र में अब फ्लाईऐश आधारित सीमेंट-फ्री सड़कें बनेंगी, लोक निर्माण विभाग और CSIR-AMPRI के बीच MoU
भोपाल। मध्यप्रदेश में अब इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण में नई तकनीक का इस्तेमाल करते हुए ‘फ्लाईऐश’ आधारित सीमेंट-फ्री सड़कें बनाई जाएंगी। राज्य में यह अपनी तरह का पहला प्रयोग होगा। इस दिशा में लोक निर्माण विभाग (PWD) और सीएसआईआर-एम्प्री (CSIR-AMPRI), भोपाल के बीच इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण को लेकर एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित राज्य स्तरीय ‘अभियंता दिवस’ समारोह के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में इस एमओयू का आदान-प्रदान किया गया।
समाचार के प्रमुख बिंदु:

- ग्रीन बिल्डिंग टेक्नोलॉजी: प्रदेश में बनने वाले सरकारी भवन अब ‘ग्रीन बिल्डिंग टेक्नोलॉजी’ पर आधारित होंगे।
- MPRDC के विकास कार्य: मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MPRDC) अगले एक साल में लगभग 2 लाख करोड़ रुपये की लागत के विकास कार्य करेगा।
- तकनीक से इंफ्रास्ट्रक्चर विकास: मुख्यमंत्री ने कहा कि लोक निर्माण विभाग तकनीक के साथ नवाचार कर रहा है और विभाग खुद फंड इकट्ठा कर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रहा है।
- इंजीनियरिंग से समाधान: लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि “इंजीनियरिंग केवल एक तकनीक नहीं, बल्कि समस्याओं का समाधान निकालने की क्षमता है।”
- सड़कों में फ्लाईऐश का इतिहास: भारत में 1976 से ही फ्लाईऐश (थर्मल पावर प्लांट की राख) का इस्तेमाल सीमेंट और कंक्रीट सड़कों के निर्माण में किया जा रहा है। महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात और तमिलनाडु में बड़े पैमाने पर इसका उपयोग होता है।
, लेकिन मुख्यमंत्री जीस यह निवेदन की सभी के योग्यता और कार्य प्रणालीको देखते हुए चार्जदिया जान क्योंकि कुछ ऐसे अधिकारियां हैं जॉकी काम नहीं ऐसेस बारिश नहीं गिर जाती सड़क
