1 साल 3 महीने और 25 दिन में बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के द्वारा अनिल कुमार पाठक को अवैधानिक तरीके से पीएचडी की उपाधि बरकतउल्ला विश्वविद्यालय को देना पढ़ सकता है भारी
1 साल 3 महीने और 25 दिन में बरकतउल्ला विश्वविद्यालय द्वारा अनिल कुमार पाठक को अवैधानिक तरीके से पीएचडी उपाधि प्रदान करना भारी पड़ता जा रहा है लोकपाल की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय जांच समिति के सामने शिकायतकर्ता ने दर्ज कराए कथन शुल्क जमा के दस्तावेज का होगा मिलान
बरकतउल्ला विश्वविद्यालय द्वारा अनिल कुमार पाठक को अवैधानिक तरीके से गणित विषय में पीएचडी उपाधि प्रदान करना भारी पड़ता जा रहा है । शिकायतकर्ता ने बताया था कि 1 साल 3 महीने 25 दिन में उनके द्वारा पीएचडी शोध कंप्लीट की है आरटीआई कार्यकर्ता ने प्राप्त RTI दस्तावेज के आधार पर उच्च स्तरीय जांच के लिए आवेदन किया है लोकपाल के द्वारा गठित कमेटी ने जिसके संबंध में पीएचडी में अध्यादेश 14 के अनुसार प्रवेश, शोध ग्रंथ जमा, मूल्यांकन, शुल्क जमा एवं पीएचडी अधिसूचना के पूर्व अहम बातों पर माननीय लोकपाल जी ने कथन लिया है।
किसी भी शासकीय सेवक को विभागीय अनुमति से शुल्क जमा करने का लेखा जोखा.जैसे अतिआवश्यक अभिलेख जांच के लिए मुख्य कड़ी है। लिखित कथन में बरकतउल्ला विश्वविद्यालय में पीएचडी पंजीयन शुल्क का लेखा रजिस्टर, शिक्षक के कारण सिनेपसीस जमा करने की अनुमति,शोध ग्रंथ मूल्यांकन शुल्क का लेखा रजिस्टर ,शोध ग्रंथ अकादमी शाखा में जमा करने का आवक रजिस्टर,शोध ग्रंथ अकादमी शाखा से गोपनीय शाखा में जमा करने का जावक रजिस्टर,-गोपनीय शाखा में शोध ग्रंथ का आवक रजिस्टर, बरकतउल्ला विश्वविद्यालय पुस्तकालय का शुल्क रजिस्टर और अनापत्ति प्रमाण पत्र दिनांक ,शोध केंद्र प्रवेश शुल्क का डीएफसी रजिस्टर,वायवा परीक्षक के बाह्य परीक्षक के पारश्रमिक भुगतान लेखा रजिस्टर,वायवा के आंतरिक परीक्षक के पारश्रमिक भुगतान लेखा रजिस्टर और विभाग की अनुमति जो नियमित शिक्षक के कारण कुछ जानकारी सेवा पुस्तिका में भी होगी के परीक्षण करना होगा. यह सब शिकायतकर्ता के द्वारा अपने कथन में लिखवाया गया है । उक्त सभी मुख्य बिंदु को जांच में लिए वगैर पारदर्शी तरीके से जांच असम्भव है। किसी दबाव या दस्तावेज वगैर जांच करने से लोकपाल कीअध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय जांच समिति पर सवालियां निशान लगना लाजमी है। चूंकि लोकपाल पूर्व न्यायधीश के साथ ही अध्यक्ष भी है। अल्प समय में पीएचडी की वैधता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।